Pukhraj-पुखराज

Pukhraj-पुखराज

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गुरु रत्न #पुखराज के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

गुरु रत्न #पुखराज
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अखिल ब्राह्मण मे विचरण कर रहे ग्रहो का रत्नों (रंगीन मूल्यवान पत्थरों ) से निकटता का संबंध होता है मनुष्य के जीवन पर आकाशीय ग्रहों उनकी बदलती चालों का प्रभाव अवश्य पड़ता है, ऐसे मे यदि कोई मनुष्य अपनी जन्म-कुंडली मे स्थित पाप ग्रहों की मुक्ति अथवा अपने जीवन से संबन्धित किसी अल्पसामर्थ्यवान ग्रह की शक्ति मे वृद्धि हेतु उस ग्रह का प्रतिनिधि रत्न धारण करता है तो उस मनुष्य के जीवन तथा भाग्य मे परिवर्तन अवश्यभावी हो जाता है बशर्ते की उसने वह रत्न असली ओर दोष रहित होने के साथ-साथ पूर्ण विधि-विधान से धारण किया हो
ज्योतिष के नवग्रहों मे एकमात्र प्रमुख ग्रह वृहस्पति को देवताओं का गुरु होने का कारण गुरु कहा जाता है यही वह मुख्य ग्रह है जिसके अनुकूल रहने पर जन्मकुंडली के अन्य पापी अथवा क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव मनुष्य पर नहीं पड़ता है अतयव योगी ज्योतिषी किसी भी जातक की कुंडली का अध्ययन करने से पूर्व उस कुंडली मे वृहस्पति की स्थिति ओर बलाबल पर सर्वप्रथम ध्यान देता है
नवग्रहों के नवरत्नों मे से वृहस्पति का रत्न ‘#पुखराज होता है इसे गुरु रत्न भी कहा जाता है  #पुखराज सफ़ेद, पीला, गुलाबी, आसमानी, तथा नीले रंगों मे पाया जाता है किन्तु वृहस्पति गृह के प्रतिनिधि रंग पीला होने के कारण ‘#पीला_पुखराज ही इस गृह के लिए उपयुक्त और अनुकूल रत्न माना गया है प्रायः #पुखराज विश्व के अधिकांश देशों मे न्यूनाधिक्य पाया जाता है , परंतु सामान्यतः ब्राज़ील का #पुखराज क्वालिटी मे सर्वोत्तम माना जाता है वैसे भारत मे भी उत्तम किस्म का #पुखराज पाया गया है
वृहस्पति के इस प्रतिनिधि रत्न को हिन्दी मे  #पुखराज, #पुष्यराज , #पुखराज ; संस्कृत मे  #पुष्यराज ; अँग्रेजी मे  #टोपाज अथवा #यलो सैफायर ; इजीप्शियन मे  #टार्शिश ; फारसी मे  #जर्द याकूत ; बर्मी मे  #आउटफ़िया ; लैटिन मे  #तोपजियों ; चीनी मे  #सी_लेंग_स्याक ; पंजाबी मे  #फोकज ; गुजराती मे  #पीलूराज ; देवनागरी मे  #पीत_स्फेटिक_माठी ; अरबी मे याकूत_अल_अजरक और सीलोनी मे  #रत्नी_पुष्परगय के नाम से पहचाना जाना जाता है