पारद शिवलिंग(Parad Shivling)
पारद शिवलिंग(Parad Shivling)

पारद शिवलिंग(Parad Shivling)

Regular price Rs. 1,250.00 Sale price Rs. 1,001.00

#पारदशिवलिंग का क्या महत्त्व है?????

वैदिक रीतियों में, पूजन विधि में, समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति में #पारद_से_बने_शिवलिंग एवं अन्य आकृतियों का विशेष महत्त्व होता है। #पारद जिसे अंग्रेजी में एलम (Alum) भी कहते हैं , एक तरल पदार्थ होता है और इसे ठोस रूप में लाने के लिए विभिन्न अन्य धातुओं जैसे कि स्वर्ण, रजत, ताम्र सहित विभिन्न जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। इसे बहुत उच्च तापमान पर पिघला कर स्वर्ण और ताम्र के साथ मिला कर, फिर उन्हें पिघला कर आकार दिया जाता है।

#पारद को भगवान् शिव का स्वरूप माना गया है और ब्रह्माण्ड को जन्म देने वाले उनके वीर्य का प्रतीक भी इसे माना जाता है। धातुओं में अगर #पारद को शिव का स्वरूप माना गया है तो ताम्र को माँ पार्वती का स्वरूप। इन दोनों के समन्वय से शिव और शक्ति का सशक्त रूप उभर कर सामने आ जाता है। ठोस #पारद के साथ ताम्र को जब उच्च तापमान पर गर्म करते हैं तो ताम्र का रंग स्वर्णमय हो जाता है। इसीलिए ऐसे शिवलिंग को "सुवर्ण रसलिंग" भी कहते हैं।

#पारद के इस लिंग की महिमा का वर्णन कई प्राचीन ग्रंथों में जैसे कि रूद्र संहिता, पारद संहिता, रस्मर्तण्ड ग्रन्थ, ब्रह्म पुराण, शिव पुराण आदि में पाया गया है।

योग शिखोपनिषद ग्रन्थ में #पारद_के_शिवलिंग को स्वयंभू भोलेनाथ का प्रतिनिधि माना गया है। इस ग्रन्थ में इसे "महालिंग" की उपाधि मिली है और इसमें शिव की समस्त शक्तियों का वास मानते हुए #पारद_से_बने-शिवलिंग को सम्पूर्ण शिवालय की भी मान्यता मिली है ।

इसका पूजन करने से संसार के समस्त द्वेषों से मुक्ति मिल जाती है। कई जन्मों के पापों का उद्धार हो जाता है। इसके दर्शन मात्र से समस्त परेशानियों का अंत हो जाता है। ऐसे शिवलिंग को समस्त शिवलिंगों में सर्वोच्च स्थान मिला हुआ है और इसका यथाविधि पूजन करने से

मानसिक, शारीरिक, तामसिक या अन्य कई विकृतियां स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।

पौराणिक ग्रंथों में जैसे कि "रस रत्न समुच्चय" में ऐसा माना गया है कि 100 अश्वमेध यज्ञ, चारों धामों में स्नान, कई किलो स्वर्ण दान और एक लाख गौ दान से जो पुण्य मिलता है वो बस पारे के बने इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही उपासक को मिल जाता है।

अगर आप अध्यात्म पथ पर आगे बढ़ना चाहते हों, योग और ध्यान में आपका मन लगता हो और मोक्ष की प्राप्ति की इच्छा हो तो आपको पारे से बने शिव लिंग की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाती है।

#पारद एक ऐसा शुद्ध पदार्थ माना गया है जो भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। इसकी महिमा केवल शिवलिंग से ही नहीं बल्कि #पारद के कई और अचूक प्रयोगों के द्वारा भी मानी गयी है।

धातुओं में सर्वोत्तम पारा अपनी चमत्कारिक और हीलिंग प्रॉपर्टीज के लिए वैज्ञानिक तौर पर भी मशहूर है।

#पारद के शिवलिंग को शिव का स्वयंभू प्रतीक भी माना गया है। रूद्र संहिता में रावण के शिव स्तुति की जब चर्चा होती है तो #पारद के शिवलिंग का विशेष वर्णन मिलता है। रावण को रस सिद्ध योगी भी माना गया है, और इसी शिवलिंग का पूजन कर उसने अपनी लंका को स्वर्ण की लंका में तब्दील कर दिया था।

कुछ ऐसा ही वर्णन बाणासुर राक्षस के लिए भी माना जाता है। उसे भी पारे के शिवलिंग की उपासना के तहत अपनी इच्छाओं को पूर्ण करने का वर प्राप्त हुआ था।

ऐसी अद्भुत महिमा है पारे के शिवलिंग की। आप भी इसे अपने घर में स्थापित कर घर में समस्त दोषों से मुक्त हो सकते हैं। लेकिन ध्यान अवश्य रहे कि साथ में शिव परिवार को भी रख कर पूजन करें।

#पारद के कुछ अचूक उपायों का विवरण निम्नलिखित है, जिन्हें आप स्वयं प्रयोग कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं:

  1. अगर आप अध्यात्म पथ पर आगे बढ़ना चाहते हों, योग और ध्यान में आपका मन लगता हो और मोक्ष के प्राप्ति की इच्छा हो तो आपको पारे से बने शिवलिंग की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाती है।
  2. अगर आपको जीवन में कष्टों से मुक्ति नहीं मिल रही हो, बीमारियों से आप ग्रस्त रहते हों, लोग आपसे विश्वासघात कर देते हों, बड़ी-बड़ी बीमारियों से ग्रस्त हों तो #पारद के शिवलिंग को यथाविधि शिव परिवार के साथ पूजन करें। ऐसा करने से आपकी समस्त परेशानियां ख़त्म हो जाएंगी और बड़ी से बड़ी बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाएगी।
  3. अगर आपको धन सम्पदा की कमी बनी रहती है तो आपको पारे से बने हुए लक्ष्मी और गणपति को पूजा स्थान में स्थापित करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जहां पारे का वास होता है वहां माँ लक्ष्मी का भी वास हमेशा रहता है। उनकी उपस्थिति मात्र से ही घर में धन लक्ष्मी का हमेशा वास रहता है।
  4. अगर आपके घर में हमेशा अशांति, क्लेश आदि बना रहता हो, अगर आप को नींद ठीक से नहीं आती हो, घर के सदस्यों में अहंकार का टकराव और वैचारिक मतभेद बना रहता हो तो आपको #पारद निर्मित एक कटोरी में जल डाल कर घर के मध्य भाग में रखना चाहिए। उस जल को रोज़ बाहर किसी गमले में डाल दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे घर में सदस्यों के बीच में प्रेम बढ़ना शुरू हो जाएगा और मानसिक शान्ति की अनुभूति भी होगी।

#पारद को पाश्चात्य पद्धति में उसके गुणों की वजह से Philospher's stone भी बोला जाता है। आयुर्वेद में भी इसके कई उपयोग हैं।

  1. अगर आप उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, हृदय रोग से परेशान हैं, या फिर अस्थमा, डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों से ग्रसित हैं तो आपको #पारद से बना मणिबंध जिसे कि ब्रेसलेट भी कहते हैं, अच्छे शुभ मुहूर्त में पहननी चाहिए। ऐसा करने से आपकी बीमारियों में सुधार तो होगा ही आप शान्ति भी महसूस करेंगे और रोगमुक्त भी हो जाएंगे।

पारे के शिवलिंग के पूजन की महिमा तो ऐसी है कि उसे बाणलिंग से भी उत्तम माना गया है। जीवन की समस्त समस्याओं के निदान के लिए पारद के उपयोग एवं इससे सम्बंधित उपाय अत्यंत प्रभावशाली हैं। यदि इनका आप यथाविधि अभिषेक कर, पूर्ण श्रद्धा से पूजन करेंगे तो जीवन में सुख और शान्ति अवश्य पाएंगे।

 

सनातन धर्म के कितने ही महत्वपूर्ण ग्रंथों में इस #पारद_शिवलिंग की महत्ता को पढ़ा जा सकता है |

शिवपुराण :- 
गोध्नाश्चैव कृतघ्नाश्चैव वीरहा भ्रूणहापि वा
शरणागतघातीच मित्रविश्रम्भघातकः
दुष्टपापसमाचारी मातृपितृप्रहापिवा
अर्चनात रसलिङ्गेन् तक्तत्पापात प्रमुच्यते |

अर्थात् गौ का हत्यारा , कृतघ्न , वीरघती गर्भस्थ शिशु का हत्यारा, शरणगत का हत्यारा, मित्रघाती, विश्वासघाती, दुष्ट, पापी अथवा माता-पिता को मारने वाला भी यदि #पारद_शिवलिंग की पूजन करता है तो वह भी तुरंत सभी पापों से मुक्त हो जाता है |

ब्रम्हपुराण :- 
धन्यास्ते पुरुषः लोके येSर्चयन्ति रसेश्वरं | 
सर्वपापहरं देवं सर्वकामफलप्रदम्॥

अर्थात् संसार में वे मनुष्य धन्य हैं जो समस्त पापों को नष्ट करने वाले तथा समस्त मनोवांछित फलों को प्रदान करने वाले #पारद_शिवलिंग की पूजन करते हैं और पूर्ण भौतिक सुख प्राप्त कर परम गति को प्राप्त कर सकते हैं।

वायवीय संहिता :- 
आयुरारोग्यमैश्वर्यं यच्चान्यदपि वाञ्छितं,
रसलिन्गाचर्णदिष्टं सर्वतो लभतेऽनरः

अर्थात् आयु आरोग्य ऐश्वर्य तथा और जो भी मनोवांछित वस्तुएं हैं उन सबको #पारद_शिवलिंग की पूजा से सहज में ही प्राप्त किया जा सकता है|

शिवनिर्णय रत्नाकर :- 
मृदा कोटिगुणं सवर्णम् स्वर्णात् कोटिगुणं मणे:|
मणात् कोटिगुणं त् कोटिगुणं वाणो वनत्कोतिगुनं रसः|
रसात्परतरं लिङ्गं न् भूतो न भविष्यति||

अर्थात् मिट्टी या पाषाण से करोड़ गुना अधिक फल स्वर्ण निर्मित शिवलिंग के पूजन से मिलता है | स्वर्ण से करोड़ गुना अधिक मणि और मणि से करोड़ गुना अधिक फल बाणलिंग नर्मदेश्वर के पूजन से मिलता है |स्वर्ण से करोड़ो गुना अधिक मणि और मणि से करोड़ो गुना अधिक फल बाणलिंग नर्मदेश्वर के पूजन से प्राप्त होता है |नर्मदेश्वर बाणलिंग से भी करोड़ो गुना अधिक फल #पारद निर्मित शिवलिंग (रसलिंग) से प्राप्त होता है |इससे श्रेष्ठ शिवलिंग न तो संसार में हुआ है और न हो सकता है|

रसर्णवतन्त्र :- 
धर्मार्थकाममोक्षाख्या पुरुषार्थश्चतुर्विधा:
सिद्ध्यन्ति नात्र सन्देहो रसराजप्रसादत:

अर्थात जो मनुष्य #पारद_शिवलिंग की एक बार भी पूजन कर लेता है। उसे इस जीवन में ही धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों प्रकार के पुरुषार्थो की प्राप्ति हो जाती है। इसमें संदेह करने का लेशमात्र भी कारण नहीं है।

श्लोक:- 
स्वयम्भुलिन्ग्सह्सैर्यत्फ़लम् संयगर्चनात
तत् फलं कोटिगुणितं रसलिंगार्चनाद भवेत्।

अर्थात~ हजारों प्रसिद्ध लिंगों की पूजा से जो फल मिलता है। उससे करोड़ो गुना फल #पारद निर्मित शिवलिंग (रसलिंग ) की पूजा से मिलता है।

सर्वदर्शन संग्रह:- 
अभ्रकं तव बीजं तु मम बीजं तु पारद:
बद्धो पारद्लिङ्गोयं मृत्युदारिद्रयनाशनम्|

स्वयं भगवान शिवशंकर भगवती पार्वती से कहते हैं कि #पारद को ठोस करके तथा लिंगाकार स्वरुप देकर जो पूजन करता है उसे जीवन में मृत्यु भय व्याप्त नहीं होता और किसी भी हालत में उसके घर दरिद्रता नहीं रहती।

ब्रह्मवैवर्तपुराण:- 
पूजयेत् कालत्रयेन यावच्चन्द्रदिवाकरौ।
कृत्वालिङ्गं सकृत पूज्यं वसेत्कल्पशतं दिवि॥
प्रजावान भूमिवान विद्द्वान पुत्रबान्धववास्तथा।
ज्ञानवान् मुक्तिवान् साधु: रसलिंगार्चनाद भवेत् ॥

अर्थात् जो ऐक बार भी #पारद_शिवलिंग का विधि विधान से पूजन कर लेता है वह जब तक सूर्य और चन्द्रमा रहते हैं तब तक शिवलोक में वास करता है तथा उसके जीवन में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा,पुत्र, पौत्र, बन्धु-बान्धव, जमीन-जायदाद, विद्या आदि में कोई कमी नहीं रहती और अन्त में वह निश्चय ही मुक्ति प्राप्त करता है।

अर्थात् #पारद _एक महान उपलब्धि है। यह आदिदेव महादेव का प्रत्यक्ष रुप है क्योंकि #पारद शुभं बीज माना जाता है। इसकी उत्पत्ति के बारे में कहा गया है कि शिव के सत्व से उत्पन्न हुआ है। यही कारण है कि शास्त्रकारों ने इसे साक्षात् शिव माना है। विशुद्ध #पारद को संस्कार द्वारा बाधित करके यदि किसी भी देवी-देवता की प्रतिमा बनाई जाए तो वह स्वयं सिद्ध होती है। वाग्भट्ट के अनुसार जो व्यक्ति #पारद_शिवलिङ्ग का भक्तिपूर्वक पूजन करता है उसे तीनों लोकों में स्थित शिवलिङ्गो के पूजन का फल प्राप्त होता है। इसके दर्शन मात्र सैकड़ो अश्वमेघ यज्ञ, करोड़ो गोदान एवं हजारों स्वर्ण मुद्राओं के दान करने का फल मिलता है| #पारद_शिवलिंग का जिस घर में नित्य पूजन होता है ,वहा सभी प्रकार के लौकिक-पारलौकिक सुखो की सहज प्राप्ति होती है। #पारद_शिवलिंग आध्यात्मिक तथा भौतिक पूर्णता को साकार करने में पूर्ण समर्थ है। प्राचीनकाल से ही देव,दानव, मानव, गन्धर्व, किन्नर सभी ने महोदव को अपनी साधना ,एवं तपस्या से प्रसन्न कर श्रेठता को प्राप्त किया ,एवं काल को अपने वश में कर संसार में अजेय होकर अपनी विजय पताका फहराई।

आदिदेव महादेव ही ,ऐसे दयालु हैं जो भक्त के दोषो को अनदेखा करते हुए अल्पायु मानव को अमरत्व का वरदान प्रदान कर देते हैं।
ब्रह्मा के लेख के विरुद्ध जो अदेय है, उसे भी महादेव सहज में ही दे देते हैं।
भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारि:- ,ऐसे आदि देव महादेव का प्रत्यक्ष रुप #पारद_शिवलिंग की प्राप्ति अत्यधिक दुर्लभ है। यह कामना है कि संयोगवश आपकी भी भेंट किसी योगी, साधू , संत, विद्द्वान या पीर-फकीर से हो जाये और पूर्ण समर्पित भाव से शिवलिंग को प्राप्त कर आप उसकी सेवाकर अपने जीवन की पूर्णता को प्राप्त करें।