Kouri-कौड़ी
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Kouri-कौड़ी

Kouri-कौड़ी

Regular price Rs. 251.00 Sale price Rs. 151.00

 

कौड़ी:-   कौड़ी उपासना की वस्तु है।

इसके बिना तो मनुष्य का अंतिम संस्कार भी संपन्न नहीं होता है।
भारती ही नहीं अन्य देशों में भी कौड़ी धार्मिक आयोजकों से जुड़ी है।
नए खरीदे वाहन को दुर्घटना से बचाने के लिए काले धागे में कौड़ी पिरोकर बांधते हैं।
नए बनने वाले मकानों की चौखट पर भी काले धागे में बांध कर कौड़ी लटकाते हैं,
ताकि निर्माण कार्य सुगमता से पूरा हो सके।
तिजोरी में पुराने चांदी के सिक्कों के साथ कौड़ी लाल कपड़े में बांध कर रखी जाती है।
दीपावली के दिन चांदी के सिक्कों के साथ कौड़ी को भी दूध आदि से नहलाकर पूजा की जाती है।
पुरानी हवेलियों में खुदाई के दौरान उनकी नींव में कौडि़यां पाई जाती हैं।
वर-वधू के हाथों में शादी के समय जो कंगन पहनाया जाता है, उसमें भी कौडि़यां बंधी होती हैं।
उड़ीसा में विवाह के पश्चात कौड़ी भेंट करने का रिवाज है।
असम की जनजातियों में वर अपनी वधू को विवाह के समय कौड़ी उपहार में देता है, जिसमें वह सिंदूर रखती है।
विदेशों में वीनस, सिबे्रला, अफ्रोदाहत, अस्तानी जैसी सुंदरता और पे्रम की देवियों की उपासना कौड़ी से की जाती है।
अधिक संतान की इच्छा रखने वाली सूडानी औरतें अपनी कमर में कौडि़यों की करधनी पहनती थीं। बाद में इसे आभूषण का रूप दे दिया गया और सोने की कौडि़यों की करधनी चलन में आई।
कौड़ी का सांस्कृतिक महत्त्व है ही, पर पूरे विश्व में मुद्रा के चलन से पहले लेन-देन में कौडि़यों का ही प्रयोग किया जाता रहा है। 

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