एकाक्षी नारियल (tal)
एकाक्षी नारियल (tal)

एकाक्षी नारियल (tal)

Regular price Rs. 501.00 Sale price Rs. 251.00

हमारी सनातन पूजा पद्धति में नारियल का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म की कोई भी पूजा बिना श्रीफल अर्पण के पूर्ण नहीं होती। चाहे वह प्रसाद रूप में हो या भेंट के रूप में, श्रीफल का हमारी पूजा पद्धति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सभी नारियल श्रीफल नहीं होते केवल  एकाक्षी नारियल ही श्रीफल होता है।

 

'श्री' अर्थात् लक्ष्मी, 'एकाक्षी नारियल' को साक्षात् लक्ष्मी का रूप माना गया है। यह अत्यन्त दुर्लभ होता है। सैंकड़ों-हजारों नारियलों में कोई एक श्रीफल 
होता है। एकाक्षी नारियल अर्थात् श्रीफल जिसके भी पास होता है उस पर सदैव लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। उसे जीवन में कभी आर्थिक संकटों का सामना नहीं करना पड़ता। एकाक्षी नारियल को तोड़ना अशुभ होता है।

 



एकाक्षी नारियल में तीन के स्थान पर केवल दो रेखाएं ही होती हैं। एकाक्षी नारियल प्राप्त होने पर विशेष मुहूर्तों जैसे दीपावली, होली, रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य, ग्रहण काल आदि पर षोडषोपचार पूजा कर उसे लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान या तिजोरी में रखने या पूजा स्थान में रखने से सदैव लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। एकाक्षी नारियल में धन आकर्षण की अद्भुत क्षमता होती है।

 

कैसे करें एकाक्षी नारियल की पूजा

 

एकाक्षी नारियल प्राप्त होने पर किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य, होली इत्यादि में इसका विधिवत् पूजन करें।

 

पूजाघर में एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं 
उस पर एकाक्षी नारियल स्थापित करें।

 

घी व सिन्दूर का लेप तैयार करें।

 

उस लेप को एकाक्षी नारियल पर अच्छे से लगाएं ध्यान रहे कि केवल आंख को छोड़कर शेष पूरे नारियल को घी मिश्रित सिन्दूर के लेप से आवेष्टित करना है।

 

तत्पश्चात एकाक्षी नारियल को कलावा या मौली से लपेटकर अच्छी तरह से पूरा ढंककर लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर उसकी षोडषोपचार पूजा करें। पूजा के उपरान्त निम्न मंत्र की कम से कम 11 माला कर एकाक्षी नारियल को सिद्ध करें।

 

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं महालक्ष्मी स्वरूपाय एकाक्षी नारिकेलाय नम:

 

जप के उपरान्त निम्न मंत्र की 1 माला से हवन करें।

" श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं महालक्ष्मी स्वरूपाय एकाक्षि नारिकेलाय सर्वसिद्धिं कुरू कुरू स्वाहा॥"