Crystal Sphatik Sreeyantra
Crystal Sphatik Sreeyantra

Crystal Sphatik Sreeyantra

Regular price Rs. 3,000.00 Sale price Rs. 2,551.00


स्फटिक अपने आप मे एक शक्तिशाली पत्थर है एवं उसपर बना श्रीयंत्र सर्वाधिक लोकप्रिय प्राचीन यन्त्र है, इसकी अधिष्टात्री देवी स्वयं श्रीविद्या अर्थात त्रिपुर सुन्दरी हैं और उनके ही रूप में इस यन्त्र की मान्यता है। यह बेहद शक्तिशाली ललितादेवी का पूजा चक्र है, इसको त्रैलोक्य मोहन अर्थात तीनों लोकों का मोहन यन्त्र भी कहते है। गुरुवार के द‌िन घर में स्फटिक श्री यंत्र की स्थापना भी धन की परेशानी दूर करने के ल‌िए फायदेमंद है।
हमारे शास्त्रों मे भी कहा गया है कि यदि लक्ष्मी जी, विष्णु जी के साथ मनुष्य के घर में स्थायी रूप से निवास करें, तो व्यक्ति के जीवन में किसी भी वस्तु तथा भौतिक सुखों का अभाव हो ही नही सकता। हमारे शास्त्रों में इस लिये इस दिन विशेष रूप से स्फटिक ‘श्री यंत्र’ जो कि माँ लक्ष्मी जी का आधार एवं मनुष्य को जीवन में हर प्रकार का भौतिक सुख और ऐश्वर्य देने वाला है तथा दरिद्रता को जीवन से दूर करने वाला है, इस श्री यंत्र की घर में स्थापना विधान बतलाया गया है।
ऐसे करें स्फटिक श्रीयंत्र की स्थापना
स्फटिक श्री यंत्र या लक्ष्मी यंत्र को चावल की ढेरी पर स्थापित कर उत्तराभिमुख हो, गुलाबी आसन, खीर का नैवेद्य, गुलाब का इत्र, कमल या गुलाब पुष्प से पूजन कर दिए गए मंत्र का यथाशक्ति जप करें। तपश्चात सभी सामग्री यंत्र को छोड़कर पोटली बनाकर या गल्ले-तिजोरी में रख दें।
मंत्र-
* ‘ॐ श्रीं श्रियै नम:।।’
* ‘ॐ कमल वासिन्यै श्रीं श्रियै नम:।।’
* ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं श्रियै नम:।।’
ब्रह्म मुहूर्त में इस प्रयोग को करें। इस दिन पूजा के पश्चात एक मुठ्ठी बासमती चावल बहते हुए जल में श्री महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए व श्री मंत्र का जप करते हुए जल प्रवाह कर दें।
ध्यान रहे स्फटिक श्री यन्त्र की जितनी पूजा होती है उतना ही बल मिलता है।
स्फटिक श्री यंत्र का निर्माण सिद्ध मुहूर्त में ही किया जाता है। गुरुपुष्य योग, रविपुष्य योग, नवरात्रि, धन-त्रयोदशी, दीपावली, शिवरात्रि, अक्षय तृतीया आदि स्फटिक श्रीयंत्र निर्माण के श्रेष्ठ मुहूर्त हैं। शुभ अवसरों पर श्री यंत्र की पूजा का विधान है।
सुविख्यात स्फटिक श्रीयंत्र भगवती त्रिपुर सुंदरी का यंत्र है। इसे यंत्रराज के नाम से जाना जाता है। श्रीयंत्र में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा विकास का प्रतीक होने के साथ मानव शरीर का भी द्योतक है। यह सर्व रक्षाकर सर्वव्याधिनिवारक सर्वकष्टनाशक होने के कारण यह सर्वसिद्धिप्रद सर्वार्थ साधक सर्वसौभाग्यदायक माना जाता है। व्यापारियों के लिए इसे गंगाजल और दूध से स्वच्छ करने के बाद पूजा स्थान या व्यापारिक स्थान तथा अन्य शुद्ध स्थान पर रखा जाना चाहिए। इसकी पूजा पूर्व की तरफ़ मुंह करके की जाती है,सफटिक श्रीयंत्र का सीधा मतलब है,लक्ष्मी यंत्र जो धनागम के लिये जरूरी है।