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On Hakik stone-

हकीक को हिंदी में अकीक और अंग्रेजी में अगेट के नाम से जाना जाता है। अगेट यानि हकीक नाम ग्रीस देश के सिसिली शहर की नदी अचैट्स से लिया गया है। ग्रीक दार्शनिकों ने इस रत्न को 300 ईसा पूर्व खोजा था। इसे प्राचीन समय में योद्धाओं के पत्थर के रूप में जाना जाता था। इतना ही नहीं मिस्त्र में धारण करने वाले प्रसिद्ध ताबीज भी हकीक रत्न से बने होते थे। हकीक विभिन्न रूपों और रंगों में आते हैं और सभी रत्नों में जल्द से जल्द अच्छा भाग्य व स्वस्थ शरीर प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। हकीक कई रंग जैसे काले, दूधिया सफेद, ग्रे, नीले, हरे, गुलाबी व भूरे रंग में उपलब्ध होते हैं। इसके साथ ही ब्लू बैंडेड अगेट, बैंडेड अगेट, ब्लैक अगेट, ब्लू लेस अगेट, बोत्सवाना अगेट, बुल आई अगेट, कैथेड्रल अगेट, कोलोरिन अगेट, क्रैकेल्ड फायर अगेट, क्रेजी लेस अगेट, डेन्ड्रिटिक अगेट, फायर अगेट, फायर-बर्न अगेट, जिओड अगेट, ग्रीन अगेट, हौली ब्लू अगेट, लगुन अगेट, लूना अगेट, मौस अगेट आदि प्रकार के हकीक पाए जाते हैं। हकीक/अकीक रत्न स्थिरता, सुरक्षा प्रदान करने वाला क्रिस्टल होता है। यह एक शांति पूर्ण रत्न है जो लोगों की मुश्किल घड़ी में मदद करता है और उन्हें शांति प्रदान करता है। हकीक से आंतरिक शक्ति और मज़बूती प्राप्त होती है। यह तनाव पूर्ण परिस्थितियों में भी काफी मददगार साबित होता है। हकीक आपको व्यावहारिक निर्णय लेने वाली स्थितियों में शांत बनाए रखता है। हकीक दैविक ऊर्जा के साथ संपर्क बनाए रखने में मदद करता है जिससे आपके भीतर आध्यात्मिक विचार उत्पन्न होते हैं। इसके प्रभाव से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागरुक होता है।

हकीक रत्न के फायदे
हकीक आपके जीवन में स्थिरता लेकर आता है और आपके भीतर भावनात्मक, शारीरिक और बौद्धिक संतुलन बनाए रखता है। हकीक के कुछ मुख्य फायदे इस प्रकार हैं-

यदि हम बात करें शारीरिक रूप से होने वाले फायदों की, तो हकीक से हड्डियों व जोड़ों की समस्या कम होती है साथ ही कंधे व गर्दन का दर्द भी दूर होता है।
यह खासतौर पर बुढ़ापे में शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
इसके प्रभाव से भाग्य अच्छा होता है और आपकी लोकप्रियता भी बढ़ती है।
यह भय पर काबू पाने में मदद करता है और ताकत प्रदान करता है।
हकीक का इस्तेमाल सुरक्षा, सफलता और साहस के लिहाज़ से भी किया जाता है।
हकीक की मदद से आप अपने स्वप्न की व्याख्या कर सकने में कामयाब होते हैं।
इस रत्न की मदद से आप अपने भय से ऊपर उठ पाएंगे और आगे बढ़ेंगे।
यह रत्न मतली, ऐंठन और पाचन मुद्दों के प्रभाव को भी कम कर देता है।
हकीक के प्रभाव से प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है।
इतना ही नहीं हकीक के द्वारा उत्पन्न होने वाली गर्म ऊर्जा गर्भावस्था व स्तन कैंसर में लाभदायक होती है।
इसका प्रयोग काले जादू, बुरी आत्माओं व नकारात्मक विचारों के प्रभाव से बचाने के लिए भी किया जाता है।
हकीक रत्न के नुकसान
जहां तक बात की जाए हकीक के नुकसान की, तो इस रत्न का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं होता है। कितने रत्ती यानि वज़न का हकीक रत्न धारण करना चाहिए?

हकीक सभी मुख्य रत्नों का उप-उप रत्न विकल्प होता है। इसे आमतौर पर माला या अंगूठी के रूप में पहना जाता है। ज्योतिषी की सलाह के मुताबिक बताए गए रंग के अनुसार कोई भी व्यक्ति हकीक को धारण कर सकता है। हकीक रत्न को धारण करने के लिए कैरेट माप का पालन नहीं किया जाता है।

हकीक का ज्योतिषीय विश्लेषण
हकीक का इस्तेमाल चक्कर आने, सिरदर्द साथ ही साथ त्वचा की समस्याओं से निजात पाने के लिए किया जाता है। यह बहुत ज़रूरी है कि यह रत्न आपकी त्वचा के संपर्क में रहे साथ ही उस अंग के भी पास हो जिसे उपचार की आवश्यकता है। आंखों की थकान व सूजन को मिटाने के लिए भी हकीक का इस्तेमाल लाभकारी है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं को कम करने के लिए भी हकीक का इस्तेमाल किया जाता है। पृथ्वी चक्र को संतुलित बनाए रखने में हकीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। हकीक रत्न एक आध्यात्मिक संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करता है, जो दैविक शक्ति के साथ हमें जोड़ने में मदद करता है। यह हारा लाइन ऊर्जा में आने वाली रुकावटों को हटाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके प्रभाव से ऊर्जा पूरे शरीर में सिर से पांव तक प्रवाह होती है और भावनात्मक दर्द से भी छुटकारा मिलता है। इसके अलावा यह पृथ्वी और आकाश के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है और समग्र जागरूकता बढ़ाता है। चूंकि हकीक का कोई नुकसान नहीं होता है, ऐसे में यह ज़ाहिर है कि इसके प्रभाव से प्रेम, धन, सौभाग्य, सद्भाव की भावना बढ़ेगी और यह बच्चों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करता है। हकीक को इतिहास का सबसे प्राचीन रत्न बताया गया है और यह बहु रंगीन चल्सिनी समूह के अंतर्गत आता है। हकीक हमारी धारणाओं को भिन्न करने में मदद करता है और पहनने वाले को मज़बूती प्रदान करता है।

हकीक की रासायनिक संरचना
क्वार्ट्ज खनिज के छोटे-छोटे क्रिस्टल को मिलाकर हकीक बनाया जाता है जो क्रिस्टल के रूप में दिखाई नहीं देते हैं। यह पारदर्शी से लेकर अपारदर्शी पदार्थ में भी उपलब्ध होता है। हकीक की गुरुत्वाकर्षण सीमा 2.6-2.7 तक होती है। इसका रासायनिक सूत्र (SiO2) यानि सिलिकॉन डाइऑक्साइड है। इसकी कठोरता 7 है और यह एक षट्कोणीय क्रिस्टल होता है। यह सभी खनिज परिवेशों में पाया जाता है, लेकिन यह अग्निमय चट्टानों में सबसे ज़्यादा प्रचलित है।

कौन कर सकता है हकीक रत्न को धारण? प्राचीन समय में हकीक का इस्तेमाल श्राप से बचने के लिए किया जाता था। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होता है जो शादी के बंधन में नए-नए बंधे हैं। हकीक रत्न का इस्तेमाल आभूषण के तौर पर भी किया जाता था। प्राचीन काल में सुमेरिया व मिस्त्र के लोग अंत्येष्टि के अनुष्ठान में भी इस रत्न का इस्तेमाल करते थे। ब्यूटी इंडस्ट्री के लिए भी यह रत्न बहुत महत्वपूर्ण है। यह उच्च एसिड और अन्य प्रकार केमिकल्स के प्रभावों को कम करता है। यह पहनने वाले को सच्चे दोस्तों और झूठे लोगों के बीच अंतर करने में सक्षम बनाता है। यह समृद्धि भी लाता है और आपके व्यवहार में विनम्रता व मधुरता लाता है।

हकीक रत्न धारण करने की विधि
इसे हमेशा चांदी की अंगूठी में पहनना चाहिए। इसके अलावा हकीक की अंगूठी को शनिवार के दिन सूर्योदय के पश्चात सीधे हाथ की मध्य अंगुली में धारण करना चाहिए। वैसे हकीक पहनने का एक सामान्य तरीका उसे धागे में धारण करना भी है। हकीक की माला आपको पाप, काला जादू व तंत्र आदि से सुरक्षित रखती है।

असली हकीक रत्न की पहचान कैसे करें?
जब बात वास्तविक हकीक की पहचान करने की आती है तो उसके रंग, बनावट और आकार के स्तर पर ध्यान देना चाहिए। उच्च गुणवत्ता वाले हकीक का निर्माण सख्त और उन्नत उत्पादन तकनीक के ज़रिए किया जाता है जो इसकी सतह की चमक को बढ़ाता है। ज़्यादातर लोग हकीक को एक चमकदार, बैंडिड रत्न के रूप में जानते हैं और यह असली हकीक के निर्माण करने में ज़रूरी सभी आवश्यक पहलुओं में से एक है।