ब्राह्मी (Bramhi)
ब्राह्मी (Bramhi)
ब्राह्मी (Bramhi)
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ब्राह्मी (Bramhi)
ब्राह्मी (Bramhi)

ब्राह्मी (Bramhi)

Regular price Rs. 300.00 Sale price Rs. 125.00

#ब्राह्मी के लाभ

#ब्राह्मी का पौधा हिमालय की तराई में हरिद्वार से लेकर बद्रीनारायण के मार्ग में अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो बहुत उत्तम किस्म का होता है। #ब्राह्मी पौधे का तना जमीन पर फैलता जाता है। जिसकी गांठों से जड़, पत्तियां, फूल और बाद में फल भी लगते हैं। इसकी पत्तियां स्वाद में कड़वी और काले चिन्हों से मिली हुई होती है। #ब्राह्मी के फूल छोटे, सफेद, नीले और गुलाबी रंग के होते हैं। ब्राह्मी के फलों का आकार गोल लम्बाई लिए हुए तथा आगे से नुकीलेदार होता है जिसमें से पीले और छोटे बीज निकलते हैं। #ब्राह्मीकी जड़ें छोटी और धागे की तरह पतली होती है। इसमें गर्मी के मौसम में फूल लगते हैं।
विभिन्न भाषाओं में नाम : 
हिंदी ब्राह्मी
अंग्रेजी बकोपा मोनिएरा
मराठी ब्राह्मी
गुजराती ब्राह्मी
बंगाली ब्राह्मी, शाक, थुलकुडी
फारसी जर्णव
लैटिन सेण्टाला एश्सियाटिका
अंग्रेजी इण्डियन पेनीवर्ट
संस्कृत पोतवंका, सोमवल्ली, महौषधि, दिव्या, सरस्वती, मण्डूकपर्णी, मण्डूकी, शारदा, कपोतबंका
रंग : #ब्राह्मी हरे और सफेद रंग का होता है।
स्वाद : यह खाने में फीका होता है।
स्वरूप : #ब्राह्मी के पेड़ अधिकतर गंगा नदी के किनारे पाये जाते हैं। #ब्राह्मी का पेड़ छत्ते के समान जमीन पर फैला हुआ होता है। #ब्राह्मी की एक और प्रजाति होती है। जिसको मंडक पर्णी कहा जाता है। इसकी बेल भी पृथ्वी पर फैलती है। #ब्राह्मी के पत्ते छोटे होते हैं। हमारे देश में अधिकतर यही पायी जाती है।
स्वभाव : यह शीतल (ठंडी) होती है।
हानिकारक प्रभाव : #ब्राह्मी का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिर दर्द, घबराहट, खुजली, चक्कर आना और त्वचा का लाल होना यहां तक की बेहोशी भी हो सकती है। #ब्राह्मी दस्तावर (पेट को साफ करने वाला) होता है। अत: सेवन में सावधानी बरतें और मात्रा के अनुसार ही सेवन करें।
उपाय : #ब्राह्मी के दुष्प्रभाव को मिटाने के लिए आप सूखे धनिये का प्रयोग कर सकते हैं।
दोषों को दूर करने वाला : दूध और वच इसके गुणों को सुरक्षित रखते हैं एवं इसमें व्याप्त दोषों को दूर करते हैं।
तुलना : #ब्राह्मी की तुलना मण्डूक परणी से की जा सकती है।
मात्रा : 1 से 3 चम्मच #ब्राह्मी के पत्तों का रस, ताजी हरी पत्तियां 10 तक सुखाया हुआ बारीक चूर्ण 1 से 2 ग्राम तक, पंचांग (फूल, फल, तना, जड़ और पत्ती) चूर्ण 3 से 5 ग्राम तक और जड़ के चूर्ण का सेवन आधे से 2 ग्राम तक करना चाहिए।
गुण : #ब्राह्मी बुद्धि तथा उम्र को बढ़ाता है। यह रसायन के समान होती है। बुखार को खत्म करती है। याददाश्त को बढ़ाती है। सफेद दाग, पीलिया, प्रमेह और खून की खराबी को दूर करती है। खांसी, पित्त और सूजन को रोकती है। बैठे हुए गले को साफ करती है। #ब्राह्मीका उपयोग दिल के लिए लाभदायक होता है। यह उन्माद (मानसिक पागलपन) को दूर करता है। सही मात्रा के अनुसार इसका सेवन करने से निर्बुद्ध, महामूर्ख, अज्ञानी भी श्रुतिधर (एक बार सुनकर जन्म भर न भूलने वाला) और त्रिकालदर्शी (भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य को जानने वाला) हो जाता है, व्याकरण को पढ़ने वाले अक्सर इस क्रिया को करते हैं। मण्डूक परनी भी ब्राह्मी के गुणों के समान होती है। #ब्राह्मी घृत, ब्राही रसायन, ब्राही पाक, #ब्राह्मी तेल, सारस्वतारिष्ट, सारस्वत चूर्ण आदि के रूप में प्रयोग किया जाता हैं।
विभिन्न रोगों में प्रयोग :
1. मिर्गी (अपस्मार) होने पर : 14 से 28 मिलीलीटर #ब्राह्मीकी जड़ का रस या 3 से 6 ग्राम चूर्ण को दिन में 3 बार 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ लेने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।
2. धातु क्षय (वीर्य का नष्ट होना) : 15 #ब्राह्मी के पत्तों को दिन में 3 बार सेवन करने से वीर्य के रोग का नष्ट होना कम हो जाता है।
3. आंखों की बीमारी में : 3 से 6 ग्राम #ब्राह्मीके पत्तों को घी में भूनकर सेंधानमक के साथ दिन में 3 बार लेने से आंखों के रोग में लाभ होता है।
4. आंखों का कमजोर होना : 3 से 6 ग्राम #ब्राह्मी के पत्तों का चूर्ण भोजन के साथ लेने से आंखों की कमजोरी दूर हो जाती है।
5. स्मरण शक्ति वर्द्धक :- 
• 10 मिलीलीटर सूखी #ब्राह्मी का रस, 1 बादाम की गिरी, 3 ग्राम कालीमिर्च को पानी से पीसकर 3-3 ग्राम की टिकिया बना लें। इस टिकिया को रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ रोगी को देने से दिमाग को ताकत मिलती है।
• 3 ग्राम #ब्राह्मी, 3 ग्राम शंखपुष्पी, 6 ग्राम बादाम गिरी, 3 ग्राम छोटी इलायची के बीज को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को थोड़े-से पानी में पीसकर, छानकर मिश्री मिलाकर पीने से खांसी, पित्त बुखार और पुराने पागलपन में लाभ मिलता है।
• #ब्राह्मी के ताजे रस और बराबर घी को मिलाकर शुद्ध घी में 5 ग्राम की खुराक में सेवन करने से दिमाग को ताकत प्रदान होती है।
6. नींद को कम करने के लिए : 
• #ब्राह्मी के 3 ग्राम चूर्ण को गाय के आधा किलो कच्चे दूध में घोंटकर छान लें। इसे 1 सप्ताह तक सेवन करने से लाभ पहुंचता है।
• 5-10 मिलीलीटर ताजी #ब्राह्मी के रस को 100-150 ग्राम कच्चे दूध में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
7. पागलपन (उन्माद) में :-
• 3 ग्राम #ब्राह्मी, 2 पीस कालीमिर्च, 3 ग्राम बादाम की गिरी, 3-3 ग्राम मगज के बीज तथा सफेद मिश्री को 25 गाम पानी में घोंटकर छान लें, इसे सुबह और शाम रोगी को पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है।
• 3 ग्राम #ब्राह्मी के थोड़े से दाने कालीमिर्च के पानी के साथ पीसकर छान लें। इसे दिन में 3 से 4 बार पिलाने से भूलने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
• #ब्राह्मीके रस में कूठ के चूर्ण और शहद को मिलाकर चाटने से पागलपन का रोग ठीक हो जाता है।
• #ब्राह्मीकी पत्तियों का रस तथा बालवच, कूठ, शंखपुष्पी का मिश्रण बनाकर गाय के पुराने घी के साथ सेवन करने से पागलपन का रोग दूर हो जाता है।