बहेड़ा चूर्ण (BEHDA POWDER)
बहेड़ा चूर्ण (BEHDA POWDER)
बहेड़ा चूर्ण (BEHDA POWDER)

बहेड़ा चूर्ण (BEHDA POWDER)

Regular price Rs. 300.00 Sale price Rs. 100.00

परिचय :#बहेड़ा के पेड़ बहुत ऊंचे, फैले हुए और लंबे होते हैं। इसके पेड़ 18 से 30 मीटर तक ऊंचे होते हैं जिसकी छाल लगभग 2 सेंटीमीटर मोटी होती है। इसके पेड़ पहाडों और ऊंची भूमि में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसकी छाया स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। इसके पत्ते बरगद के पत्तों के समान होते हैं तथा पेड़ लगभग सभी प्रदेशों में पाये जाते हैं। इसके पत्ते लगभग 10 सेंटीमीटर से लेकर 20 सेंटीमीटर तक लम्बे तथा और 6 सेंटीमीटर से लेकर 9 सेंटीमीटर तक चौडे़ होते हैं। इसका फल अण्डे के आकार का गोल और लम्बाई में 3 सेमी तक होता है, जिसे #बहेड़ा के नाम से जाना जाता है। इसके अंदर एक मींगी निकलती है, जो मीठी होती है। औषधि के रूप में अधिकतर इसके फल के छिलके का उपयोग किया जाता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी बहेड़ा
संस्कृत विभीतक
अंग्रेजी बेलेरिक मिरोबोलम
मराठी बहेड़ा
गुजराती बहेड़ां
बंगाली बहेड़े
कर्नाटकी तारीकायी
मलयालम तान्नि
तमिल अक्कनडं
तेलगू बल्ला
फारसी वलैले
लैटिन टर्मिनेलिया बेलेरिका

रंग : इसका रंग भूरा पीलापन लिए होता है।

स्वाद : इसका स्वाद मीठा होता है।

स्वरूप : #बहेड़ा का पेड़ जंगलों और पहाड़ों पर होता है। इसके पत्ते बरगद के पत्तों के समान होते हैं। इसके फूल बहुत ही छोटे-छोटे होते हैं। इसके फल वरना के गुच्छों के फल के समान गुच्छों में लगते हैं। #बहेड़ा की छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

स्वभाव : #बहेड़ाशीतल होता है।

हानिकारक : #बहेड़ा फल की मींगी का अधिक मात्रा में उपयोग करने से शरीर में विषैला प्रभाव होता है, जिससे गुदा प्रभावित होता है। इसके अधिक सेवन से नशा भी पैदा होता है।

दोषों को दूर करने वाला : शहद, #बहेड़ा के दोषों को दूर करता है।

तुलना : आंवला और काली हरड़ से #बहेड़ाकी तुलना की जा सकती है।

मात्रा : #बहेड़ा के सेवन की मात्रा 3 ग्राम से 6 ग्राम तक होनी चाहिए।

गुण : #बहेड़ा कब्ज को दूर करने वाला होता है। यह मेदा (आमाशय) को शक्तिशाली बनाता है, भूख को बढ़ाता है, वायु रोगों को दस्तों की सहायता से दूर करता है, पित्त के दोषों को भी दूर करता है, सिर दर्द को दूर करता है, बवासीर को खत्म करता है, आंखों व दिमाग को स्वस्थ व शक्तिशाली बनाता है, यह कफ को खत्म करता है तथा बालों की सफेदी को मिटता है। #बहेड़ा-कफ तथा पित्त को नाश करता है तथा बालों को सुन्दर बनाता है। यह स्वर भंग (गला बैठना) को ठीक करता है। यह नशा, खून की खराबी और पेट के कीड़ों को नष्ट करता है तथा क्षय रोग (टी.बी) तथा कुष्ठ (कोढ़, सफेद दाग) में भी बहुत लाभदायक होता है।

#बहेड़ा की मींगी : #बहेड़ा की मींगी प्यास को मिटाती है। यह उल्टी को रोकती है, कफ को शांत करती है तथा वायु दोषों को दूर करती है। यह हल्की, कषैली और नशीली होती है। आंवला की मींगी के गुण भी इसी के समान होता है। इसका सुरमा आंखों के फूले को दूर करता है।

आयुर्वेदिक मतानुसार : #बहेड़ा रस में मधुर, कषैला, गुण में हल्का, खुश्क, प्रकृति में गर्म, विपाक में मधुर, त्रिदोषनाशक, उत्तेजक, धातुवर्द्धक, पोषक, रक्तस्तम्भक, दर्द को नष्ट करने वाला तथा आंखों के लिए गुणकारी होता है। यह कब्ज, पेट के कीड़े, सांस, खांसी, बवासीर, अपच, गले के रोग, कुष्ठ, स्वर भेद, आमवात, त्वचा के रोग, कामशक्ति की कमी, बालों के रोग, जुकाम तथा हाथ-पैरों की जलन में लाभकारी होती है।

वैज्ञानिक मतानुसार : #बहेड़ा की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता कि इसके फल में 17 प्रतिशत टैनिन, 25 प्रतिशत मींगी में हलके पीले रंग का तेल, सैपोनिन और राल पाए जाते हैं।

विभिन्न रोंगों का #बहेड़ा से उपचार :

1 हाथ-पैर की जलन में :- #बहेड़ा की मींगी (बीज) पानी के साथ पीसकर हाथों और पैरों में लगाने से जलन में आराम मिलता है।

2 जलन :- #बहेड़ा के गूदे को बारीक पीसकर शरीर पर लेप करने से सभी भी प्रकार की जलन दूर हो जाती है।

"3 कफ :- *#बहेड़ा के पत्ते और उससे दुगुनी चीनी का काढ़ा बनाकर पीने से कफरोग दूर हो जाता है।
*#बहेड़ा की छाल का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहने से खांसी मिट जाती है और बलगम आसानी से निकल जाता है। खांसी की गुदगुदी बंद हो जाती है।"

4 कामशक्ति बढ़ाने हेतु : - रोजाना एक #बहेड़ा का छिलका खाने से कामशक्ति तेज हो जाती है।

5 आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए :- #बहेड़ा का छिलका और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर एक चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी से लेने से दो-तीन सप्ताह में आंखों की रोशनी बढ़ जाती है।

6 कब्ज :- #बहेड़ा के आधे पके हुए फल को पीस लेते हैं। इसे रोजाना एक-एक चम्मच की मात्रा में थोड़े से पानी से लेने से पेट की कब्ज समाप्त हो जाती है और पेट साफ हो जाता है।

"7 श्वास या दमा :- *#बहेड़ाऔर धतूरे के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीस लेते हैं इसे चिलम या हुक्के में भरकर पीने से सांस और दमा के रोग में आराम मिलता है।
*#बहेड़ा को थोड़े से घी से चुपड़कर पुटपाक विधि से पकाते हैं। जब वह पक जाए तब मिट्टी आदि हटाकर #बहेड़ा को निकाल लें और इसका वक्कल मुंह में रखकर चूसने से खांसी, जुकाम, स्वरभंग (गला बैठना) आदि रोगों में बहुत जल्द आराम मिलता है।
*केवल #बहेड़ा का छिलका मुंह में रखने से भी सांस की खांसी दूर हो जाती है।
*40 ग्राम #बहेड़ाका छिलका, 2 ग्राम फुलाया हुआ नौसादर और 1 ग्राम सोनागेरू लें। अब बहेड़े के छिलकों को बहुत बारीक पीसकर छान लें और उसमें नौसादर व गेरू भी बहुत बारीक करके मिला देते हैं। इसे सेवन करने से सांस के रोग में बहुत लाभ मिलता है। मात्रा : उपयुर्क्त दवा को 2-3 ग्राम तक शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। इससे दमा रोग ठीक हो जाता है।
*250 ग्राम #बहेड़ा के फल का गूदा लेकर पीसकर छान लें और फिर इसमें 10 ग्राम फूलाया हुआ नौसादर और 5 ग्राम असली सोनागेरू लेकर पीसकर मिला दें। अब इस तैयार सामग्री को 3 ग्राम रोजाना सुबह व शाम को शहद में मिलाकर चाटने से सांस लेने में फायदा मिलता है तथा इससे धीरे-धीरे दमा भी खत्म हो जाता है।
*#बहेड़ा  के छिलकों का चूर्ण बनाकर बकरी के दूध में पकायें और ठण्डा होने पर शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार रोगी को चटाने से सांस की बीमारी दूर हो जाती है।"

8 बालों के रोग :- 2 चम्मच #बहेड़ा के फल का चूर्ण लेकर एक कप पानी में रात भर भिगोकर रख देते हैं और सुबह इसे बालों की जड़ पर लगाते हैं। इसके एक घंटे के बाद बालों को धो डालते हैं। इससे बालों का गिरना बंद हो जाता है।

"9 अतिसार (दस्त):- *बहेड़ा के फलों को जलाकर उसकी राख को इकट्ठा कर लेते हैं। इसमें एक चौथाई मात्रा में कालानमक मिलाकर एक चम्मच दिन में दो-तीन बार लेने से अतिसार के रोग में लाभ मिलता है।
*2 से 5 ग्राम #बहेड़ा के पेड़ की छाल और 1-2 लौंग को 1 चम्मच शहद में पीसकर दिन में 3-4 बार रोगी को चटाने से दस्त बंद हो जाते हैं।
*#बहेड़ा को भूनकर खाने से पुराने दस्त बंद हो जाते हैं।"

10 पेचिश :- #बहेड़ा के छिलके का चूर्ण एक चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम नियमित रूप से लेने से पीलिया का रोग दूर हो जाता है।

11 मुंहासे :- बीजों की गिरी का तेल रोजाना सोते समय मुंहासों पर लगाने से मुंहासे साफ हो जाते हैं और चेहरा साफ हो जाता है।

12 शक्ति बढ़ाने के लिए :- आंवले के मुरब्बे को रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से शरीर मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है।

13 बच्चों का मलावरोध (लैट्रिन रुकने) पर :- #बहेड़ा का फल पत्थर से पीसकर आधा चम्मच की मात्रा में एक चम्मच दूध के साथ बच्चे को सेवन कराने से पेट साफ हो जाता है।

14 स्वित्र कोढ़ (कुष्ठ रोग) और पेचिश : - #बहेड़ा के पेड़ की छाल का काढ़ा स्वित्र कोढ़ और पेचिश को नष्ट करता है।

15 सांस की खांसी :- एक #बहेड़ा लेकर उसके ऊपर घी चुपड़ दें और आटे में बंदकर आग पर रखकर पका लेते हैं। इसके बाद #बहेड़ा को निकालकर उसकी छाल को निकाल लेते हैं। यह छाल अकेले ही बहुत ही तेज सांस और खांसी को दूर करती है। थोड़ी-थोड़ी छाल मुंह में डालकर चूसना चाहिए। इसका प्रयोग करते समय खटाई, मिर्च और तेल का परहेज करना चाहिए और मैथुन क्रिया भी नहीं करनी चाहिए।

16 कंठसर्प पर :- #बहेड़ा की वृक्ष की छाल को पानी में पीसकर पिलाना चाहिए। पालतू पशुओं को कंठ सर्प होने पर भी यही औषधि देनी चाहिए।

17 पालतू पशुओं के घाव में कीड़े पर जाने पर :- पशुओं के घाव में कीड़े हो जाने पर #बहेड़ा की छाल को मोटी रोटी के साथ खिलाना चाहिए।

18 भिलावां के कांटे से उत्पन्न छाले: - #बहेड़ा के गूदे को घिसकर लगाना चाहिए अथवा #बहेड़ा के गूदे, मधुयष्टि, नागरमोथा और चंदन का लेप करना चाहिए।

19 #बहेड़ा का मुरब्बा :- #बहेड़ा को बर्तन में डालकर उबाल लें और उसके पानी में शक्कर डालकर गाढ़े मुरब्बे के अनुसार- चाशनी को तैयार कर ले फिर उसमें उबाले हुए बहेड़े तथा छोटी पीपल का चूर्ण डालकर किसी बर्तन में रख देते हैं। ज्यों-ज्यों वह मुरब्बा पुराना होता जाएगा, त्यों-त्यों विशेष गुण दिखलाएगा। इस मुरब्बे से खांसी तुरन्त दूर हो जाती है।

20 मूत्रकृच्छ : - #बहेड़ा की फल की मींगी का चूर्ण 3-4 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर सुबह-शाम चाटने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) और पथरी में लाभ मिलता है।