Diamond & Rashi Ratna


#रत्नों की परिभाषा -
#रत्न,विषेकर खनिज वर्ग के रत्न,कठोर चिकने और आभा बाले होते है,प्रकाश रश्मियों के परावर्तन करने की इनमे अद्भुत क्षमता होती है इसलिए प्रकाश का सम्पर्क प्राप्त करके ये झिलमिलाने लगते है,कई #रत्नों में स्वयं आभा होती है और वे रात्रि में भी प्रकाशित होते रहते है,यधपि यह प्रकाश सूर्य रश्मियों से ग्रहण किया हुआ होता है।फिर भी उस प्रकाश को दीर्घकाल तक रोके रखने का गुण,इनमे विशेष रूप से होता है,सभी #रत्नों का अपना रूप रंग होता है जो प्रकाश में आकर्षक सौंदर्य के रूप में प्रतीत होने लगता है,इनको तरासने से इनका सौंदर्य बढ़ जाता है,इनके सघन घ्नतत्व के तथा चिकने पन के कारण जलवायु का इन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता और ये चिरकाल तक अविकृत रह सकते है।
रस #रत्न_समुच्चय""के अनुसार #पदमराग,#इन्द्रनील,#मरकत, #पुष्पराग, #हिरा,---ये पांच रत्न श्रेष्ठ कहलाते है
इन पांच #रत्नों में दो पाषाणज #गोमेद #वैदूर्य तथा दो प्राणिक #मुक्ता व् #प्रवाल मिलकर 9 रत्न मुख्य माने जाते है
#रत्नों का बहिर्मुखी प्रभाव देह विज्ञान के अंतर्गत आयुर्वेद शाश्त्र का विषय रहा है और अंतर्मुखी प्रभाव रश्मिविज्ञानी ज्योतिषियों के विवेचन का विषय रहा है आयुर्वेद और बलवृद्धि करता है।ज्योतिष इनके धारण करने से रोगशान्ति दुष्टग्रहशमन आदि का प्रकार बतलाता है और कहा गया है..

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